Hindi Poem

मेरा मित्र, मेरा भाई

ज़माना हो गया तेरी आवाज़ सुने हुए।
कैसे पहचानूँ अब तेरी आवाज़ इस भीड़ में?
सोचता हूँ क्यों छोड़ दिया मैंने तेरा हाथ,
जबकि तूने थामा था मुझे सदा के लिए?

आँसू ही आहार बन गए मेरा,
जबसे दिल मैंने दुखाया तेरा।
हर एक दिन रोया मैं तेरे बिना,
हर एक कर्ज़ चुकाया था तूने मेरा।

वापस आ सकता था यह जानता ना था।
तेरी दया को पहचानता ना था।
मुझको तूने हर कदम माफ़ किया,
पर मैं तेरी बातें मानता ना था।

पर तेरा प्यार कभी कम न होता।
तू भी तो मेरे लिए था रोता।
मेरे लिए तूने सब कुछ किया,
वरना मैं जाने आज कहाँ होता।

तू भी सोचता था “कब आएगा
मेरा भाई वापस मेरे पास?
क्यों मेरा भाई मुझसे दूर है?
क्यों हुआ मेरा मित्र इतना उदास?”

आज समझ आया है कि,
तूने मेरा जीवन बचाया है।
मेरी सज़ा को ले लिया तूने,
तूने मुझे छुड़ाया है।

अब मैं तेरे पास आना चाहता हूँ।
तेरी ही शरण में रहना चाहता हूँ।
अब नहीं दिल तेरा दुखाऊँगा,
मैं अब सिर्फ तुझको ही चाहूँगा।