Hindi Poem – नयी शुरुआत

नयी शुरुआत

नया जोश, नया विश्वास,
और नयी आशा की किरण
लिए हूँ अपने साथ।
बस! अब और प्रतीक्षा नहीं।
इस ही क्षण से, इस ही पल से,
फिर ऊठ कर आगे बढूँगा,
एक नयी शुरुआत करूँगा।

जान गया हूँ मैं,
क्यों हारा था मैं पहले।
मन में विश्वास तो था,
मन में उत्साह तो था,
पर भ्रम का संसार लिए था,
प्रकाश में अंधकार लिए था।
जानता न था कि
बहुत बुरा है यह संसार।
दिखावे के लिए जी रहे हैं कितने!
दिखावा है कितनों का स्नेह और प्यार!

मैं जो कर रहा था
उसे सभी ने सराहा,
पर मुझे क्या पता था कि
उसमें कोई बात न थी?
मैंने उसे ज़ारी रखा,
अनेक स्वप्न सजाए, अनेक ख्वाब देखे।
पर सब टूट कर चूर हो गए।

दोष किसे दूँ,
स्वयं को, या फिर उस संसार को,
जिसने मुझे गलत मार्ग दिखाया?
या मेरा नादान मन,
जो सही-गलत पहचान न पाया?

पर हताश होना ठीक नहीं,
किस्मत पर भी रोना ठीक नहीं।
परिश्रम से किस्मत भी बदलती है ,
अपने भाग्य का यूँ निर्माण करूँगा।
पुनः नई शुरुआत करूँगा ।

दुनिया बदले,
पर मैं न बदलूँगा।
जो है सही,
मैं वही करूँगा।
लोग नए दिन में करते हैं नई शुरुआत
मैं हर पल नई शुरुआत करूँगा।

सम्भावना है कि मैं
थक जाऊँ, गिर जाऊँ
हार जाऊँ, टूट जाऊँ,
पर मैं पुनः उठ उठ कर,
अपनी शक्ति का संचय कर
मन में पुनः विश्वास जगाकर
स्वयं से लड़ूँगा, आगे बढूँगा।
फिर नई शुरुआत करूँगा,
एक नई शुरुआत करूँगा।