Hindi Poem – आँसू पोंछने आया है

आँसू पोंछने आया है

खुद ही तोड़ा मैंने अपना दिल,
अपना दिल मैंने खुद दुखाया है।
पर यह देख कृतज्ञ हुआ हूँ,
कि तू मेरे आँसू पोंछने आया है।

इस दुनिया से दिल लगाकर
बड़ा गुनाह कर दिया मैंने।
तुझे दूर कर अपने जीवन से,
स्वयं को चोट पहुंचाई मैंने।

मैं ही ज़िम्मेदार हूँ अपने इस दुःख का,
मैंने ही स्वयं को रुलाया है।
पर यह देख हर्षित हुआ हूँ,
कि तू मेरे आँसू पोंछने आया है।

कितनी बार तूने मुझे बुलाया,
फ़िर भी मैं जिद्द कर बैठा।
जा पहुँचा गुनाह की बस्ती में,
वहीं पर डेरा कर बैठा।

आज उस ही गुनाह की बस्ती ने,
बहुत मुझे सताया है।
पर यह देख आनन्दित हुआ हूँ,
कि तू मेरे आँसू पोंछने आया है।

मैं भी कितना बड़ा मूर्ख था
व्यर्थ बैर कर बैठा तुझसे!
आज गिर पड़ा असहाय सा,
यह कैसी भूल हुई मुझसे!

जख्म दिए मैंने ही खुद को,
पर तू मरहम लगाने आया है।
यह देख बड़ी राहत मिली,
कि तू मेरे आँसू पोंछने आया है।

अब मुझको थाम ले फ़िर से,
देख, मैं लौट आया हूँ।
गले से मुझको लगा ले फ़िर से,
सब कुछ छोड़ तेरे पास आया हूँ।

मैं खुश हूँ यह देख कर कि,
तूने मुझे बचाया है।
मैंने सिर्फ़ तुझे दुःख ही दिया,
पर तू मेरा दुख मिटाने आया है।
मेरे आँसू पोंछने आया है।