मानव की पहचान
जीवन एक चुनौती है।
जीवन एक संग्राम है।
जीतकर आगे बढ़ना ही,
मानव की पहचान है।
यदि एक पत्थर से ही डर जाएगा,
तो पर्वत कैसे पार करेगा?
यदि एक नदी मात्र पर न तैर सके,
तो सागर कैसे पार करेगा?
शिलाएँ तोड़कर, नदी मोड़कर
अपना मार्ग बनाता चल।
पाप छोड़कर, कर्म जोड़कर
अपनी ज्योत जगाता चल।
अभी तो सिर्फ़ ज़मीं पाई है,
आगे पूरा आसमान है।
सँकटों को जीत लेना ही,
मानव की पहचान है।
चुभने दे पाँवों में पत्थर,
अभी काँटों पर भी चलना है।
प्रत्येक क्षण सँघर्ष बहुत है,
तुझको बहुत सम्भलना है।
थकें न तेरे पैर कभी भी,
न कभी तेरे कदम रुकें।
हिम्मत से चलते रहना तू,
चाहे पैरों में काँटे चुभें।
सच्चाई की राह पर चलना
नहीं इतना आसान है।
सच्चाई पर अंत तक डटे रहना,
मानव की पहचान है ।